ख़ाब

संभल जाऊ 

 कब तक 

समेट लू ख़ुद को 

कब तक 

यादो के भंवर में उलझा रहूं 

कब तक 

ख्वाबो में ही तेरा बना रहूं 

कब तक 

 आती है ये बारिशें 

भीगने से बचा रहूं 

कब तक 

 में ज़र्रे ज़र्रे में बस जाउ 

  कब तक 

याद होगा तुम को 

  तुम उस दिन ना  आ सकी 

     और लोगो ने मेरी मयत सज़ा रखी थी 

में दूल्हे की सेज़ में था 

  फूलो से मुझे थोड़ा परहेज़ था 

  एक ख्वाब था ये तो 

  रात के अंधियारे में कही कैद था 

 दफ़न ही किया जा रहा था मैं 

  तेरी चीखों ने  उठा दिया , 

तो देखा 

  ये तो एक बदचलन ख़्वाब 

     ना जाने किस का फ़रेब 

 किस की मयत का अलाप था 


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अजनबी राजा 

मैं सुकून ढूंढता हूं

थका हारा में , मैं भी कुछ ढूंढता हूँ 

कुछ घड़ी छाँव की वो पहर ढूंढता हूँ

नंगे कदम चले जो मिलो तक 

आज उनके लिए में घर ढूंढता हूं

में अभी उम्र की नही 

एक सराय की गली ढूंढता हूं

लेकर चला था में भी सपने हज़ार 

आज वही रात , वही ख़्वाब ढूंढता हूं

में चंद पल ही सही 

ए – ज़िन्दगी सुकून ढूंढता हूं

नन्हे कदमो तले जो रखी थी जान कभी 

आज वही में मुस्कान ढूंढता हूं

वो माशूम चेहरा , 

वही स्कूल की छत ढूंढता हूं

देखने की ज़िद थी ए बुढ़ापे 

अब में वही जवानी ढूंढता हूं

थक चूके इन पैरो के लिए 

कोई वृदाश्रम ढूंढता हूं

ए ज़िन्दगी , में वही बचपन 

वो गुडे – गुड्डी का खेल ढूंढता हूं

एक रात ही सही 

मैं एक चैन की नींद ढूंढता हूं

मैं सुकून ढूंढता हूं

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अजनबी राजा

भगवान तुम्हारा भला करेगा 

धूप में खड़ा वो सुबह से एक थाल में कुछ खिलौने लिए बेच रहा था 

साहब खिलौने लेलो ना , सस्ते ओर सुंदर है , ऐसे खिलौने कही नही मिलेंगे आपको ।। चल चल गाड़ी से दूर रह 

ओर वो उस से किनारा करता हुआ निकल जाता है , 

आगे एक चौराहे पर एक बच्चा जो ठीक ठाक दिख रहा था , वो हाथ मे किसी भगवान की तस्वीर थाली में रख सड़क की दोनों ओर आने वाली गाड़ियों के आगे रख रख कर भीख मांग रहा था । 

साहब कुछ पैसे देदो ना , भगवान आपका भला करेगा , सामने ही कोई पत्रकार उसकी इस हरकत को अपने कैमरे में कैद कर रहा था 

बस जैसे ही उसने देखा , पर्स से एक कड़कड़ाहट वाला सो का नोट उसकी थाली में रख दिया और उस तस्वीर के आगे नतमस्तक  हो मुस्कुराता हुआ आगे चल पड़ा । 

वो लड़का अब भी कड़ी धूप में खिलौने बैच रहा था ।।

देखना तो अब ये था कि जिस भगवान की वो बात कर रहा था 

वो अब भला किसका करने वाला था पता नही …………………………………………….😐😐

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अजनबी राजा 

​रात ये थमती क्यू नही 

हवा की मानिंद ये चलती है 

रात ये थमती क्यू नही

किसी क़ब्रिस्तान के सन्नाटो सी 

ये रात कभी रुकती क्यू नही

आवाज़ एक ना सुनाई दे यहाँ 

फिर भी ये अपनी फ़ितरत बदलतीं क्यू नही

मुल्क सारा सो गया है इसकी आग़ोश में 

फिर ये रात खुद सोती क्यू नही

थम के बरसती है यहां बरसाते 

एक रात ये यहाँ ठहरती क्यू नही

जंगल के वीरानों सी यहां की गलियां 

कोई मंजिल यहाँ से दिखती क्यू नही

भटक गया हूं में तो अपने मुक़ाम से 

तू ऐ रात यहाँ दर बदर भटकर भी

भटकती क्यू नही 

रात ये थमती क्यू नही

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अजनबी राजा

कठोर सत्य 

रमा 

रमा कहा हो हमे देर हो रही है 

तुमको पता था ना कि हमे वहाँ जाना है 

फिर भी तुम महिलाये ना जाने कितना सजती संवरती हो , 

उसने दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा 

, अब दरवाजा भी तो खोलो 

मुझे भी चेंज करना है 

लो अभी तुम उसी साड़ी में हो 

नही चलना क्या , मिश्रा जी के लड़के के नामकरण मे 

वो चुप सी पलंग पर सिर नीचे किये बैठी थी 

हमारा जाना जरूरी है उसने बिना ऊपर देखे कहा 

अरे ये कोई बात हुई 

जब उन्होंने हमें बुलाया है और नही जाएंगे तो , तब अच्छा लगेगा 

नही फिर भी पूछ रही हूं 

हा जाना जरूरी है 

ओर वो जाकर आईने के सामने टाई बांधने लगा 

रमा जो वही पत्थर बनी बैठी थी ,वहां से उठ खड़ी हुई और 

आईने के सामने खड़े राज से खुद को सटाकर खड़ी हो गयी 

हम बाँझ है ना , वहां लोग हमें किस नज़र से देखेंगे तुम नही जानते 

राज जो अभी टाई की आखरी गांठ लगा रहा था 

वो अब एकदम स्तब्ध सा हो गया 

मानो लहू किसी बर्फ़ की चोटी में जम गया हो 

वो निरुत्तर सा कमरे के दरवाज़े को बंद करता हुआ बाहर आ गया , सामने बग़ीचे में वो  किसी पेड़ की छाया में उसके पीछे चली आ रही उस परछाई को छुपाने लगा 

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अजनबी राजा

मोहब्बत , वो मज़हब

पता है ना तुम को 

नही रह सकती बिना तुम्हारे 

वो उसका हाथ अपने हाथ मे लिए नीचे जमीन पर बैठी , उस सूखे फ़र्श को अपने अश्को से भिगाए जा रही थी । 

, समझा कर यार

हम दोनों ही तो मजबूर है 

वरना में जी पाऊंगा बिन तेरे ?

फिर क्यू तुम भूल जाने की बात करते हो 

, तो बता क्या करूँ 

आज हमारे रिस्ते को पूरे 5 साल हो गए है 

यार कब तक हम अपनी ज़िंदगी इन खंडहरों में गुजारेंगे , 

कल आया था तेरी गली में, सबको पता है फिर भी वो मुझे बस एक काफ़िर समझ रहे थे ।

भाग चलते है फ़िर , वो इतना कहकर चुप हो गयी

बस्ती जला दी जाएगी यार 

एक हमारे घर की ख़ातिर हम कितने घर उझाड़ते फिरेंगे 

, एक दम से वो उठ खड़ी हुई जो अभी उसका हाथ अपने हाथों में लिए बैठी थी । 

, कहा जा रही हो 

घर 

फिर कब मिलोगी 

कभी नही 

सही बता यार 

नही बस अब कुछ नही , तुम भी यही चाहते हो ना । 

जानती हूं में भी सब 

तुम अपना ग़म उन कोरे सफों पर लिखकर रो दो गे । में किस को बताती फिरूंगी 

अभी जहाँ सिसकिया सुनाई दे रही थी , वहां अब किसी मयत सा सन्नाटा छा गया था । 

आखिर में मैने ही उन खामोशियो को तोड़ा , 

याद है तुमको तुम ही ने कहा था 

वो मोहब्बत ही किया जिसमें तलब बस जिस्म की हो 

।। 

मोहब्बत तुम भी करती रहना 

मोहब्बत में भी करता रहूंगा 

में यही मिल जाऊंगा किसी किताबो में 

कभी दिल चाहे गर मिलने का 

।।।।।

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अजनबी राजा

वो औरत

कुछ साल हो गए थे उसे उस नयी बस्ती में आये हुए 

फिर भी वो आज भी उन सबके लिए नयी ही थी , 

बाज़ार जाते वक़्त हर बार कोई मर्द उस को छुए बिना उसके अंतर्मन को स्पर्श कर ही जाता 

करती भी क्या वो आखिर , औरत जो थी 

अकेली , 

साँझ ढलते ही वो भी अपने घर में दुबक जाती थी , जैसे कोई हिरण जंगल में किसी शेर से बचकर झाड़ में गुळाची मार लेता था 

। दो कमरों और साथ में एक किचन वाला वो घर , उसके लिए किसी महल से कम नही था 

साथ में थी तो बस वो नन्ही जान 

जिसके अभी दुग्ध के वो नन्हे दांत भी नहीं टूटे थे , 

हर एक उसके घर के सामने से गुज़रने वाला , उसको किसी चरित्रहीन की दृष्टि से जरूर देखता । 

एक रात भरी बारिश में किसी ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी 

रात के 1 बजे कोन होगा इस वक़्त 

वो डरी पर संभल कर परी को सोता देख , 

दरवाजे की और बड़ी 

दरवाजा खुलते ही कुछ 3 – 4 चार लोग उसके घर में घुस आए 

, बाहर बारिश आज बड़ी जमकर बरस रही थी , , , सुबह की पहली किरणों ने आकर उस को थामां 

परी की चीखों ने पड़ोस के घर की आखिर नींद उड़ा ही दी 

वो रात का खुला दरवाजा यू ही खुला ही पड़ा रहा 

अंदर एक औरत अब जो किसी जन्मे बच्चे की तरह बेआबरू अवस्था में फ़र्श पर पड़ी थी 

एक हाथ में उसकी वो साड़ी का पल्लू , और एक हाथ अब भी हवा में दीवार पर लगी उस तस्वीर की और इसारा कर रहा था 

जहाँ एक सुन्दर सी तस्वीर भारतीय सेना की वर्दी पहने हाथ में तिरंगा लिए हुए 

नीचे कुछ बड़े अक्षरों में शहीद ******* , लिखा साफ़ नज़र आ रहा था 

।।।। वो औरत जिसकी वो सफ़ेद साडी अब किसी कफ़न में बटने को तैयार थी 

😢😢😢😢😢😢

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अजनबी राजा