तुम बदल गयी 

हालात वही हो गए 

 तुम मेरे ना सही फिर किसी के हो गए 

 

ख़त हज़ार लिखे उन पतो पर 

तेरे शहर के नाम फिर खो गए 
हालात फिर वही हो गए

तेरे आँशुओ के मोती टूट कर चूर हो गए 
याद होगा तुमको 

वो अल्हड़ जवानी थी 

 एक नए घर की कहानी थी 

मैं था अजनबी तेरी बस्ती में 

तू वहां की सहज़ादी थी 

 तेरे बदलते वो अल्फ़ाज़ 

  अधूरे खत हो गए 

सच मे तुम फिर बेवफ़ा हो गए 

मेरी भीगी पलके 

तेरे ख़तो को भीगा गयी 

हालात मेरे मुझ को 

किसी खंडहर सा बना गयी 

में ठहरा इश्क़ का फ़क़ीर 

 ओर मुझ को तू फिर किसी 


मज़ार का बना गयी 

 रेत की मानिद था में 

समझ के तू मुझ को रेगिस्ता 

 फिर क्यू काफ़िर बना गयी 

  पूछती है वो स्कूल की गलियां 

 तेरे लबो की वो हसीं 

 क्यू बेहया हो गयी 

 आती है इन रातो को तेरी यादे 

  फिर तू क्यू बेजुबां हो गयी 



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अजनबी राजा 




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अजनबी राजा 

9602923068

❤ 💔 🌷🌷

 रेलवे स्टेशन , ओर वो 

में टिकट काउंटर पर था , 

  लौटकर जब वापस आया , एक कूड़ी (लड़की), अम्मा के संग बैठी बाते कर रही थी , में भी वही पास में आकर बैठ गया ,ओर रेलवे का फ्री वाईफाई उड़ा रहा था ,  

  माँ उस से कुछ पूछ रही थी पर वो सामने से की पता नही पंजाबी में ही कुछ कह रही थी , ओर मम्मी को कुछ समझ नी आ रहा था

 ओर इधर अम्मा की भाषा उसे नी समझ आ रही थी , 

  मुझे देख वो फिर मुझ से ही पूछ बैठी की , तोड़ी ममी है 

 हा , पंजाबी नी आंदि 

जी नही आंदि 

 कहाँ से हो आप 

 जी पंजाब से , आप राजस्थान से 

 हाँ 

 पता चल जाता है , आपकी लैंगुएज से 

  जी अच्छा

  की करदे हो । 

जी पढ़ाई 

 ओर आप 

में टीचर हां 

 लुधियाना से हाँ , वही एक प्राइवेट स्कूल में पड़ान्दी हाँ 

  जी बढ़िया 

 मेने अवी बी ए 2nd ईयर के एग्जाम दिए 

  ओर राइटर भी हूँ 

 ओह्ह वाह , तब तो यार बोहत बढ़िया , क्या लिखते हो , इश्क़ की कहानियां या फिर कुछ और 

   हां वही इश्क़ , मोहब्बत ओर फिर अधूरी कहानियाँ 

  ओह्ह फिर तो प्यार भी होगा , 😋😋

 नही , करता था 

  😋

 फिर की हुआ 

 वही हुआ , उस ने मज़हब का दिलासा दिया ओर कहानी खत्म 

  एज क्या तुम्हारी 

20 साल 

 क्या सच मे , इत्ती सी उम्र , सब कुछ कर लिया 

   सच मे यार तुम बड़े चंगे हो , 

 हमारे वहां तो लड़के नशे से बाहर ही नही निकलते 

   , में 26 की हु ओर घरवाले अभी भी कोई अच्छा मुंडा वेख रहे है 

 सब नशेड़ी पड़े है वहा तो , 

   कोई मिलता भी नही है 

 ओर जो मिलता है वो , कोई NRI कूड़ी वेखदा है 

   , शादी जरूरी है लाइफ में , मेने पूछा 

 लगता है तुम भी वही सोचते हो , कोई जरूरी नही है पर , ये समाज , फिर हमारा परिवार ,परम्पराएँ सब वेखनी पड़ती है 

  सानू भी नही करनी शादी तो , लेकिन फिर क्या करे घरवालो पर भी तो असर पड़ता है 

 तुम ठहरे लड़के कही भी अपनी ज़िंदगी गुज़ार लोगे 

 पर हमारा हाल तो वही है , एक खूंटे से बंधी कोई गाय हो 

 हां ये तो सच है , हमारा एजुकेशन ही ऐसा है , सब जगह अन्धविश्वाश भरा पड़ा है  वही पुरानी परम्पराए क्या करे फिर इनका 

  साथ मे कोन है आपके 

 ममी पापा है ,घर पर 2 भाई है 2 बहने है छोटी । 

 अच्छा 

ले ये बोतल भर ला पानी की ,माँ ने कहा और में उठ के चल दिया 

 वापस आया तब भी वो वही बैठी थीं  ।

 मेरे नजदीक आते ही वो उठ खड़ी हुई और तब तक उसके पापा और ममी भी वापस आ गए थे 

  वो जाने लगी थी और हम दोनों ने अभी तक एक दूसरे का नाम भी नही पूछा था 

 वो पलट पलट के मेनू वेख रही थी , शायद पूछना था उसे कुछ और पर तबी वहां लगे स्पीकर से उसकी आने वाली ट्रेन की सूचना आनी शुरू हो गयी थी ।। 

 ओर फिर पलटती हुई वो एक हल्की मुस्कान से मुझे वेखती हुई उस भीड़ में कही खो गयी  , ओर में भी फिर ममी ओर नानी के साथ अपना जो भी सामान था उठा के , अपने प्लेटफॉर्म की ओर चल पड़ा , हमारी ट्रेन 7 बजे आने वाली थी और अभी टाइम फिर वही थमा हुआ , 5 के ऊपर चल रहा था , 

,  


वहां पहुँचने के बाद , मेरी नज़रे फिर से उसे वहां की भीड़ में ढूंढ रही थी , तबी वहां उपर लगे स्पीकर से लुधियाना जाने की ट्रेन की आने की सूचना और साथ मे प्लेटफ़ॉर्म न 2 पर आने की सूचना दी जा रही थी , 

  में  इतना सुनते ही वही वो सामान के पास बैठी माँ और नानी को खाने के लिए कुछ लाने की बात कह , वहां दौड़ पड़ा । 

 भीड़ फिर बीच मे आ खड़ी थी ,में वहां लोगो के ऊपर से हवा में कूद कूद के उसे ढूंढने की कोशिशे कर रहा था , पर 

 नही था वहां उसकी एक वो हल्की मुस्कान के सिवाए 

, भाई जी ये नमकीन का पैकेट कितने का दिया , दुकानदार , भइया जी बस 80 रुपये का 

   2 देना और एक पानी की बोतल भी , ओर में ,

भीड़ में से गुजरता हुआ वापस अपने प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ता गया 

  


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अजनबी राजा 

9692923068

एक फ़कीर

एक फ़कीर 

इश्क़ की मज़ार ढूंढता हूं 


किताबों में जो लिखे थे हर्फ़ 

उन हर्फ़ों को में ढूंढता हूं 


मजहबो की भीड़ में , 

मैं इक इंसां ढूंढता हूं 


ख़ाली वक़्त में , मैं बैठा 

किसी फ़कीर का घर ढूंढता हूं


सुबह की वो पहली किरण 

में वही रौशनी ढूंढता हूं 


अंधेरो से मैं लिपटा 

एक चिराग़ ढूंढता हूं 


एक फ़कीर

इश्क़ की मज़ार ढूंढता हूं 


ए मज़हबी इंसां 

मैं फिर वही मेरा राम -रहीम वाला वतन ढूंढता हूं 


एक फ़कीर 

इश्क़ की मज़ार ढूंढता हूं 


दर्द में लिपटे मेरे इस शरीर की 

वो नज़्मों वाली मलहम ढूंढता हूं 


कहीं जो खो गया मेरा बचपन 

में फिर वही लकड़ी के खिलौने ढूंढता हूं 



एक फ़कीर 

इश्क़ की मज़ार ढूंढता हूं 




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अजनबी राजा

ख़ाब

संभल जाऊ 

 कब तक 

समेट लू ख़ुद को 

कब तक 

यादो के भंवर में उलझा रहूं 

कब तक 

ख्वाबो में ही तेरा बना रहूं 

कब तक 

 आती है ये बारिशें 

भीगने से बचा रहूं 

कब तक 

 में ज़र्रे ज़र्रे में बस जाउ 

  कब तक 

याद होगा तुम को 

  तुम उस दिन ना  आ सकी 

     और लोगो ने मेरी मयत सज़ा रखी थी 

में दूल्हे की सेज़ में था 

  फूलो से मुझे थोड़ा परहेज़ था 

  एक ख्वाब था ये तो 

  रात के अंधियारे में कही कैद था 

 दफ़न ही किया जा रहा था मैं 

  तेरी चीखों ने  उठा दिया , 

तो देखा 

  ये तो एक बदचलन ख़्वाब 

     ना जाने किस का फ़रेब 

 किस की मयत का अलाप था 


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अजनबी राजा 

थका हारा में , मैं भी कुछ ढूंढता हूँ 

कुछ घड़ी छाँव की वो पहर ढूंढता हूँ

नंगे कदम चले जो मिलो तक 

आज उनके लिए में घर ढूंढता हूं

में अभी उम्र की नही 

एक सराय की गली ढूंढता हूं

लेकर चला था में भी सपने हज़ार 

आज वही रात , वही ख़्वाब ढूंढता हूं

में चंद पल ही सही 

ए – ज़िन्दगी सुकून ढूंढता हूं

नन्हे कदमो तले जो रखी थी जान कभी 

आज वही में मुस्कान ढूंढता हूं

वो माशूम चेहरा , 

वही स्कूल की छत ढूंढता हूं

देखने की ज़िद थी ए बुढ़ापे 

अब में वही जवानी ढूंढता हूं

थक चूके इन पैरो के लिए 

कोई वृदाश्रम ढूंढता हूं

ए ज़िन्दगी , में वही बचपन 

वो गुडे – गुड्डी का खेल ढूंढता हूं

एक रात ही सही 

मैं एक चैन की नींद ढूंढता हूं

मैं सुकून ढूंढता हूं

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अजनबी राजा

भगवान तुम्हारा भला करेगा 

धूप में खड़ा वो सुबह से एक थाल में कुछ खिलौने लिए बेच रहा था 

साहब खिलौने लेलो ना , सस्ते ओर सुंदर है , ऐसे खिलौने कही नही मिलेंगे आपको ।। चल चल गाड़ी से दूर रह 

ओर वो उस से किनारा करता हुआ निकल जाता है , 

आगे एक चौराहे पर एक बच्चा जो ठीक ठाक दिख रहा था , वो हाथ मे किसी भगवान की तस्वीर थाली में रख सड़क की दोनों ओर आने वाली गाड़ियों के आगे रख रख कर भीख मांग रहा था । 

साहब कुछ पैसे देदो ना , भगवान आपका भला करेगा , सामने ही कोई पत्रकार उसकी इस हरकत को अपने कैमरे में कैद कर रहा था 

बस जैसे ही उसने देखा , पर्स से एक कड़कड़ाहट वाला सो का नोट उसकी थाली में रख दिया और उस तस्वीर के आगे नतमस्तक  हो मुस्कुराता हुआ आगे चल पड़ा । 

वो लड़का अब भी कड़ी धूप में खिलौने बैच रहा था ।।

देखना तो अब ये था कि जिस भगवान की वो बात कर रहा था 

वो अब भला किसका करने वाला था पता नही …………………………………………….😐😐

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अजनबी राजा 

​रात ये थमती क्यू नही 

हवा की मानिंद ये चलती है 

रात ये थमती क्यू नही

किसी क़ब्रिस्तान के सन्नाटो सी 

ये रात कभी रुकती क्यू नही

आवाज़ एक ना सुनाई दे यहाँ 

फिर भी ये अपनी फ़ितरत बदलतीं क्यू नही

मुल्क सारा सो गया है इसकी आग़ोश में 

फिर ये रात खुद सोती क्यू नही

थम के बरसती है यहां बरसाते 

एक रात ये यहाँ ठहरती क्यू नही

जंगल के वीरानों सी यहां की गलियां 

कोई मंजिल यहाँ से दिखती क्यू नही

भटक गया हूं में तो अपने मुक़ाम से 

तू ऐ रात यहाँ दर बदर भटकर भी

भटकती क्यू नही 

रात ये थमती क्यू नही

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अजनबी राजा